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30 October 1883 marks the death anniversary of #SwamiDayanandSaraswati. This is a thread on the links between the #AryaSamaj & the #HinduMahasabha & the #RSS. It will also explain how the Samaj contributed to the growth of the #Sangh

#history #Hindutva #SanghParivar #BJP
The #AryaSamaj was founded on 10 April 1875 at Bombay (#Mumbai) by Swami #DayanandSaraswati. This monotheistic order laid stress on the values laid down in the #Vedas & was against idol worship.
As a counter to the proselytizing Abrahamic faiths like Christianity and Islam, the #AryaSamaj launched a reconversion campaign called #shuddhi. As the #HinduMahasabha grew in the 1920s, many #AryaSamaj leaders joined it. Shuddhi became one of the Mahasabha's driving forces
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बुद्ध मत में भविष्यवाणी ओर भाग्यवाद सम्बंधित पाखंड :-

उपरोक्त चित्र लाफिंग बुद्ध का है ,,जिसे ये बुद्ध लोग ये मानते है कि घर में रखने से सुख समर्धि और शांति प्राप्त होती है …अब भला बिना पुरुषार्थ के एक जड़ से सुख शांति कैसे मिल सकती है
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#नमोबुद्धाय #जयभीम #Buddha #Buddhism Image
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ये बात तो यही बुद्ध जानते होंगे

… इनता ही नही ये बुद्ध किसी भी व्यक्ति की भविष्यवाणी भी कर देते थे ..पुब्बकम्मपिलोतिक बुद्ध अपदान में बुद्ध ओर उनसे पूर्व के २४ और साथ के ३ और आगे आने वाले बुद्ध के बारे में ..उनके जीवन परिचय के बारे में है …

#नमोबुद्धाय #जयभीम #Buddha
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इसी के बुद्धपकिण्णक कण्ड के अनुसार गौतम बुद्ध आने वाले बुद्ध मेतेर्य बुद्ध की भविष्यवाणी करते है .. (१) सरुची नाम के तपस्वी के लिए पनोमदस्सी भगवान ने भविष्य वाणी की कि यह अपने अंतिम जीवन में सारिया नाम की ब्राह्मणी की कोख से पैदा होकर सारीपुत्त नाम वाला होकर
#नमोबुद्धाय
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(प्रश्न) वेद संस्कृतभाषा में प्रकाशित हुए और वे अग्नि आदि ऋषि लोग उस संस्कृतभाषा को नहीं जानते थे फिर वेदों का अर्थ उन्होंने कैसे जाना?

(उत्तर) परमेश्वर ने जनाया। और धर्मात्मा योगी महर्षि लोग जब-जब जिस-जिस के अर्थ को जानने की इच्छा करके ध्यानावस्थित हो

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#vedas #AryaSamaj
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परमेश्वर के स्वरूप में समाधिस्थ हुए तब-तब परमात्मा ने अभीष्ट मन्त्रें के अर्थ जनाये । जब बहुतों के आत्माओं में वेदार्थप्रकाश हुआ तब ऋषि मुनियों ने वह अर्थ और ऋषि मुनियों के इतिहासपूर्वक ग्रन्थ बनाये। उन का नाम ब्राह्मण

#veda #सत्य_को_छुपाती_मीडिया #smritiirani #Mayawati
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अर्थात् ब्रह्म जो वेद उसका व्याख्यान ग्रन्थ होने से ब्राह्मण नाम हुआ। और-

ऋषयो मन्त्रदृष्टयः मन्त्रन् सम्प्रादुः।

जिस-जिस मन्त्रर्थ का दर्शन जिस-जिस ऋषि को हुआ और प्रथम ही जिस के पहले उस मन्त्र का अर्थ किसी ने प्रकाशित नहीं किया था; किया और दूसरों को पढ़ाया भी।

#vedas #ved
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